तुम जन्मी
तो घर की दीवारों ने सांस ली,
पर समाज ने कंधे झुका लिए,
लड़की है,
कहा गया बोझ है,
पर कोई नहीं समझा
कि तुम हर पीढ़ी की शुरुआत हो।
तुम्हारी कोमलता को
हमेशा कमजोरी कहा गया,
तुम्हारे सपनों को
मर्यादा के नाम पर कुचल दिया गया,
तुम्हारे कदमों को
घर की चौखट तक रोक दिया गया,
और तुम्हारी आंखों में
बस इंतजार की परछाई छोड़ दी गई।
इबादतगाह में
तुम्हें इबादत करने से दूर रखा गया,
इतिहास के हर पन्ने में
तुम्हारा संघर्ष दबा मिला,
सीता की अग्निपरीक्षा,
द्रौपदी का अपमान,
या पद्मावती का जौहर,
हर कथा में तुम्हें
बलिदान का प्रतीक बना दिया गया।
पर तुम्हारी इच्छाएं?
उन कहानियों से
हमेशा गायब रहीं।
तुम्हारा सौंदर्य
जीत और हार का आधार बना,
तुम्हारी मौनता
हर सौदे की सहमति मानी गई,
तुम्हारी हंसी में
बस एक जिम्मेदारी की छाया देखी गई।
तुम्हें देवी कहा गया,
पर इंसान मानने से इंकार किया गया।
लेकिन अब,
तुम्हारी कहानी बदल रही है,
तुम्हारा मौन
एक गर्जना बन चुका है,
तुम्हारी आंखें
अब सपने नहीं,
संभव देखती हैं।
तुमने बंधनों को तोड़ा है,
तुमने हर दहलीज को पार किया है,
तुम खेतों में सिर्फ मेहनत नहीं करतीं,
तुम्हारा दिमाग
नई क्रांतियों का बीज बो रहा है।
तुम रसोई से बाहर निकल
अब कारखानों,
विज्ञान की प्रयोगशालाओं,
और अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक
अपनी पहचान बना रही हो।
तुम सिर्फ घर की दीवारों का सहारा नहीं,
बल्कि समाज की रीढ़ हो।
तुम्हारे कदम
गांव की पगडंडियों से लेकर
संयुक्त राष्ट्र के मंच तक गूंज रहे हैं।
तुम अब नीति निर्माता हो,
तुम भविष्य की रचनाकार हो।
तुम्हारा महिला होना
अब एक पहचान नहीं,
बल्कि एक चुनौती है
हर उस सोच के लिए
जो तुम्हें कमजोर मानती है।
तुम अब उस मशाल की तरह हो
जो अंधेरे को जलाकर
रास्ता दिखाती है।
तुमने इतिहास को
शोषण से शक्ति तक का सफर सिखाया है।
तुमने हर आंसू को
अपनी ताकत बनाया है।
तुम अब सिर्फ सहने वाली नहीं,
तुम निर्माण करने वाली हो।
तुम्हारे बिना यह समाज अधूरा है,
तुम्हारे बिना यह दुनिया अधूरी है।
तुमने हर क्षेत्र में
अपना परचम लहराया है,
तुमने हर बाधा को
अपनी ताकत में बदला है।
तुम अब सिर्फ कहानियों में नहीं रहोगी,
तुम अब इतिहास बनाओगी।
तुम वह धारा हो
जो समाज की दिशा बदल सकती है।
तुम वह शक्ति हो
जो हर युग को नई पहचान दे सकती है।
तुम नारी हो,
तुम सृष्टि का आधार हो।
तुम शक्ति हो,
तुम प्रेरणा हो।
तुम इतिहास भी हो,
और भविष्य भी।
तुम जीवन की कविता हो,
और क्रांति की शुरुआत हो।
अब तुम्हारी आवाज
हर कोने में गूंजेगी,
अब तुम्हारे कदम
हर लक्ष्य को छुएंगे।
तुम वो हो
जो दुनिया को नया रूप देगी।
तुम नारी हो,
तुम वह शक्ति हो,
जो हर युग की परिभाषा बदलेगी।
-आनन्द मिश्र
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