ज़िन्दगी मुफलिसी की आदी है,
हम ही भूखे नहीं भूंखी आबादी है ।
घने कोहरे में जाके सो गए,
अब ये चारों तरफ बर्बादी है ।
ज़िन्दगी तुझे सुकून न मिला,
चलो अच्छा हुआ आजादी है ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
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