देश भक्ति के भाव हैं हिन्दी,
भक्ति और वैराग्य हैं हिन्दी,
जन मानस के प्राण हैं हिन्दी,
भारत मां की शान है हिन्दी ।
मीरा सी दीवानी हिंदी,
और कबीर की वाणी हिंदी,
मानस की चौपाई हिंदी,
हिंदुस्तानी बोल रहीं हूं ।
दादू और मलूक की भक्ति
भूषण की वाणी और शक्ति,
देश और परदेश में रहकर,
प्रेम सुधा रस घोल रही हूं ।
रजिया और रसखान की वाणी,
पद्मावत की चौपाई हूं,
मैं रहीम के दोहे वाली,
मतवाली बन डोल रही हूं ।
ज्ञान और विज्ञान समेटे,
संस्कृति और संस्कारों वाली,
भारत की आध्यात्मिक शक्ति,
गहरे राज खोल रही हूं ।
मैं किशोर के गानों में हूं,
तानसेन की तानों में हूं,
और लता की स्वर लहरी हूं,
बोल मैं मीठे बोल रहीं हूं ।
मैं हिन्दी हूं भारत की,
पहचान और सद्भावों वाली,
जन जन के हृदय में रहती,
राष्ट्रभाषा बोल रहीं हूं ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर
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