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तह ए दिल का मुश्किल है संभलना ।

                
                                                         
                            इस पार तो , जग सुना , सुना आसमा हुआ
                                                                 
                            
जब से ख़ुदा बेरहम हुआ
बोझ से हुईं , सांसों की तार
खुद से भी मैं खुद ही लापरवाह हुआ
हर घड़ी उलझन सी रही मन में ,
ज़िंदगी भी बोझिल हुई
जाने कब होगा जाना उस पार
हो सकें तो यारो मुझको माफ करना
किसकी हसरतें होती है
नगमा गमगीन प्रस्तुत करना
हसीं होठों पे आती ही नहीं
आंखों से नमी जाती ही नहीं
वरना हम भी कभी खुशमिजाज हुआ
करते थे , हंसते थे गाते थे
अब तह ए दिल का मुश्किल है
संभलना !!
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4 महीने पहले

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