मुझ पे यूं न निसार होइए
मेरे हालत मुझे , किसी के
होने की इजाज़त नहीं देते
टूट के बिखर गया खुद जो
किसी को संभालेगा का क्या
अपनी खुश हाल ज़िंदगी
यूं मेरे वास्ते तार - तार न कीजिए
बड़े - बड़े वादे करना मुझको
गवारा नहीं , मन बहला लेते है अपना
बस तुम से गुफ्तगू करके
मेरी इस खुशमिजाजी को
मुहब्बत का नाम न दीजिए ।।
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