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देख लेता हूँ

                
                                                         
                            देख लेता हूँ तुम्हारे हुस्न को दीदार करने के लिए
                                                                 
                            
गुलनाज़ ए वफा ए इश्क अपनी अमानत के लिए

जी करता है ठहर जाऊँ तुम्हारी जुल्फों की गुलिस्ताँ मे
टपक जाए अमृत प्रेम का एक बूंद उम्र भर प्यास के लिए

क्या नाज़ करें तुम्हारे फूलों के बदन पर
खुशबुओं ने मार डाला हमें उम्र भर जीने के लिए

डाली का क्या कसूर हवाओं का चलना भी न हुआ
टूट गए वो हमारे आने से पहले गैरों के लिए

गुमनाम कर दिया जिंदगी को कश्तियों के सहारे
जिंदगी जिंदगी न रही तुम्हें एक पल पाने के लिए

हमने तो कर दिया खुद को तुम्हारे हवाले
फिक्र न रही हमारी बदनाम हो गए एक बेवफा के लिए

गुजर गया एक दर्द भरा दौर किसी की सादगी मे
अजनबी हो गए उसी को चाहते चाहते इस जमाने के लिए

- अमरेश यादव
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2 महीने पहले

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