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ग़ज़ल...

                
                                                         
                            मेरे खयाल में अब फासलों से आती है
                                                                 
                            
तुम्हारी याद भी अब दूसरों से आती है

कदम रुके हैं मुहब्बत की राह में जबसे
है सच के नींद बड़ी मुश्किलों से आती है

की जर्रा जर्रा कही टूट कर है बिखरा यूँ
सदा ये आज मेरी महफिलों से आती है

मसल चुका हुँ सभी कुछ मैं जह्न के भीतर
अभी भी तेरी कसक , हौसलों से आती है

गुजर रही है मुहब्बत की तिश्नगी दे कर
जो सर्द सर्द हवा वादियों से आती है

कई जबान में उल्फ़त को जी के गुजरा हूँ 
महक अभी भी पुराने खतों से आती है

तू मुझसे हो के जुदा, आज तक भी मेरा है
खबर ये तेरी लिखी चिट्ठियों से आती है

- आमोद बिन्दौरी /मौलिक
ग्राम बिन्दौर , पोस्ट जाफरगंज
जिला फतेहपुर ,उत्तर-प्रदेश
212657

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6 वर्ष पहले

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