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हर साल सिर्फ़ उम्र न बढ़े.....

                
                                                         
                            हर साल सिर्फ़ उम्र न बढ़े, वक़ार भी बढ़ता रहे,
                                                                 
                            
मुक़द्दर में उसके ख़ुशियों का कारोबार बढ़ता रहे।

लबों पर सदा मुस्कुराहट का इक इज़हार बढ़ता रहे,
हर नई सुबह के साथ जीने का ख़ुमार बढ़ता रहे।

दुआ है मेरी, रब पर ऐतबार उसका बढ़ता रहे,
हर क़दम पर रहमतों का प्यार बेशुमार बढ़ता रहे।

जिस तरफ़ भी उठें क़दम उसके, मंज़िलें मिलती रहें,
हर सफ़र के साथ इख़्तियार उसका बढ़ता रहे.

नज़र से दूर सही, दिल से कभी दूर न हो,
बीच हमारे मोहब्बत का किरदार वही बढ़ता रहे।
- अमित ममगाईं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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