तुम्हारे होने से
मैं तुम्हारे बिना
कुछ भी नहीं हूँ।
और तुम...
मेरे बिना भी
बहुत कुछ हो सकते हो।
पर मैं,
तुम्हारे साथ चलूँ
तो अपनी ही सीमाओं से आगे
कुछ बन जाता हूँ।
और तुम,
अगर मेरे साथ ठहरो,
तो शायद
इस दुनिया की भीड़ में
खुद को कहीं खो सकते हो।
मैं तुम्हारी यादों में
रात-भर भीग सकता हूँ,
हर ख़ामोशी को
आँसुओं में लिख सकता हूँ।
और तुम...
शायद मेरे बाद भी
सुकून से सो सकते हो।
फिर भी,
मेरी मोहब्बत
तुमसे कोई शिकायत नहीं करती।
वह तो बस
तुम्हारी ख़ुशियों की दुआ बनकर
हर साँस में जीती है।
क्योंकि
सच्चा प्रेम
पाने का नाम नहीं,
किसी के लिए
पूरी शिद्दत से जीने का नाम है।
-आचार्य अमित
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