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मीनारें ...

                
                                                         
                            "मीनारें…"
                                                                 
                            

क्या जवाब दूँ
मैं उस सवाल का,
जो बन गया है
आपकी अदद पहचान का…

जो हसरतें आपने
अपने कंधों पर उठाई हैं,
उनकी कुछ बूँदें
मेरे हिस्से भी आई हैं।

शायद इसीलिए
ये दिल भीग-सा गया है,
और ख़ामोशियों में भी
एक संगीत उतर आया है…

आईना-ए-दिल भी अब
कुछ और नायाब हो गया है,
जबसे उसमें
आपका अक्स नज़र आया है।

अब हर धड़कन में
आपकी आहट सी रहती है,
हर ख़ामोशी
आपसे कुछ कहती है।

ये सिलसिला
मुलाक़ातों का यूँ ही....
-आचार्य अमित
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एक महीने पहले

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