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कुछ साथ अनकहे से...

                
                                                         
                            कुछ साथ अनकहे से…
                                                                 
                            

कुछ साथ अनकहे से,
दूर जाकर भी पास रहते हैं…
न कोई वादा, न कोई रिश्ता,
फिर भी दिल के एहसास रहते हैं।

कुछ लोग राहों में मिलकर
राहों से आगे निकल जाते हैं,
छोड़ जाते हैं ऐसी ख़ुशबू,
जो उम्रभर साँसों में बस जाते हैं।

दूरी केवल देह की होती है,
आत्माओं की दूरी कहाँ होती है…
जो जुड़ जाएँ मौन के उस पार,
उनकी उपस्थिति हर पल होती है।

कभी आँखें बंद करो तो महसूस होगा—
कुछ चेहरे दिखाई नहीं देते,
पर भीतर दीपक बनकर जलते हैं…
कुछ हाथ छूते नहीं,
फिर भी जीवन की राहों में
संभालते चलते हैं।

शायद यही ईश्वर का संकेत है—
हर मिलन साथ रहने के लिए नहीं,
कुछ मिलन हमें बदलने के लिए होते हैं…
कुछ आत्माएँ जीवन में आती हैं
और हमें स्वयं से मिलाकर
चुपचाप आगे बढ़ जाती हैं।

इसलिए जो दूर हैं,
उन्हें दूरी मत समझना…
जो मौन हैं,
उन्हें बेगाना मत समझना…

क्योंकि सच्चे संबंध
शब्दों के मोहताज नहीं होते,
वे समय और दूरी से परे
आत्मा में जीवित रहते हैं।

और शायद…
कुछ साथ अनकहे से ही सबसे सुंदर होते हैं—
क्योंकि वहाँ प्रेम होता है,
अपेक्षा नहीं…
वहाँ स्मृति होती है,
शिकायत नहीं…
और वहाँ आत्मीयता होती है,
जिसे कोई दूरी
कभी मिटा नहीं सकती।
-आचार्य अमित
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2 महीने पहले

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