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दुआओं से बढ़कर...

                
                                                         
                            दुआओं से बढ़कर
                                                                 
                            

दुआएँ दिया करो,
दुआएँ लिया करो…
गर इतना भी न
कर सको तो, साहिब—

किसी के दर्द को
थोड़ा-सा समझा करो,
किसी की ख़ामोशी में
छुपी बात पढ़ा करो।

ज़िंदगी बहुत छोटी है,
इसे शिकवों में न गँवाया करो,
गर किसी के काम
न आ सको तो कम-से-कम,
उसके दिल को न दुखाया करो।

और गर इतना भी
न कर सको तो, साहिब—
बस मुहब्बत किया करो…
बिना मतलब, बिना शर्त,
बस इंसानियत से जिया करो।

क्योंकि आख़िर में
दौलत नहीं, शोहरत नहीं—
इंसान के हिस्से में
सिर्फ़ उसकी दुआएँ रह जाती हैं…

दुआएँ दिया करो,
दुआएँ लिया करो…
गर इतना भी न
कर सको तो, साहिब!
मुहब्बत किया करो।
-आचार्य अमित
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2 घंटे पहले

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