आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दिल होना ज़रूरी है…

                
                                                         
                            कुछ एहसास,
                                                                 
                            
कुछ आँसू और कुछ
अधूरी इंसानियत।
कुछ करने की ख़ातिर,
कुछ होना ज़रूरी है,
कुछ बनने की ख़ातिर,
ख़ुद में कुछ खोना ज़रूरी है।
कुछ होने के लिए,
कुछ सहना ज़रूरी है,
और कमबख़्त…
इस दुनिया में रोने के लिए भी,
एक ज़िंदा दिल होना ज़रूरी है।
आँसू तो आज भी दिखाई देते हैं,
एहसास भी बाज़ारों में बिकते हैं,
मगर हर नमी दर्द नहीं होती,
हर मुस्कान के पीछे सच्चाई नहीं होती।
कुछ आँसू तो इतने हुनरमंद होते हैं,
कि आँखों से गिरकर भी दिल तक नहीं पहुँचते,
वे मगरमच्छ के आँसू होते हैं हुज़ूर…
जो आँखों में तो नज़र आते हैं,
मगर किसी के दर्द में कभी बह नहीं पाते।
दिखावा कुछ पल का तमाशा हो सकता है,
मगर किसी के यक़ीन की बुनियाद नहीं,
चेहरे पर ओढ़ी हुई मासूमियत
मोहब्बत का पैग़ाम तो हो सकती है,
मगर रूह की सच्चाई नहीं।
किसी के आकर्षण में बँधना अलग बात है,
किसी की शख़्सियत का मुरीद होना अलग,
मगर किसी की रूह में उतर जाना,
उसकी हर ख़ामोशी को पढ़ पाना,
उसकी आँखों में छिपे दर्द को समझ पाना…
हर किसी के बस की बात नहीं।
किसी की चाहत तो बन सकते हैं,
किसी की ज़रूरत भी बन सकते हैं,
मगर किसी की मुराद बनने के लिए,
किसी की दुआओं में उतरना पड़ता है,
किसी के दिल में जगह बनाने के लिए,
अपने किरदार से गुज़रना पड़ता है।
सीना तो उनका भी तन सकता है,
जिनके भीतर ग़ुरूर का नामोनिशान नहीं,
ख़ामोश रहना कमज़ोरी नहीं होता हुज़ूर,
और हर ऊँची आवाज़ में
हौसले की पहचान नहीं।
काश! वो समझ भी पाते
इस दिल की ज़ुबानी को,
काश! वो पढ़ भी पाते
ख़ामोशी में छिपी कहानी को…
कि इंसान बड़ा अपने रुतबे से नहीं,
अपने एहसास से होता है,
रिश्ते बड़े वादों से नहीं,
अपने विश्वास से होते हैं।
आँसू बहाना कोई कमाल नहीं,
किसी के आँसू पोंछना हुनर है,
दिल दुखाकर जीत जाना
फ़ितरत हो सकती है,
मगर टूटे हुए दिल को जोड़ देना
इंसानियत का असली ज़ेवर है।
याद रखिए हुज़ूर…
चेहरे वक़्त के साथ
बदल जाते हैं,
लफ़्ज़ भी अक्सर
मुकर जाते हैं,
मगर जो दिल से
किसी का हो जाए,
उसके एहसास उम्र भर
ठहर जाते हैं।
क्योंकि…
दिल होना ही काफ़ी नहीं,
दिल में दर्द होना भी ज़रूरी है,
और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है—
किसी दूसरे के दर्द को
अपना समझने की मजबूरी नहीं,
बल्कि इंसानियत से भरी
एक ख़ूबसूरत मंज़ूरी है।
-आचार्य अमित
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
35 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर