सोच शुन्य, चिन्ता शुन्य
ना पाने की इच्छा,ना खोने का डर
ना किसी से प्रेम, ना किसी से भय
शान्ती खुद बखुद अपने क्रम मेआ जाती है
विश्वास,सन्तुष्टी,शून्यता, शान्ती।
न किसी बंधन की बाह,न मुक्ति की चाह,
न कल की फ़िक्र, न भुत की आह।
सांसों की लय में सिमटी घड़ीया
शून्यता के छोर पर मिले शान्ती की राह
विश्राम, मौन, शुन्य चेतना,शान्ती
ना कोइ लालसा, न चाह की आग,
शून्यता के आंगन में सासो का धीमा राग।
भीतर की दुनिया जब हो जाए शांत,
अनायास मिल जाए जिन्दगी का मुल मंत्र
सत्य,सत्य बोध,शून्य विचार, शान्ती।
- अमित कुमार पांडेय
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