धैर्य, ताकत, साहस भर दो विजयपथ के इस युद्ध में
हे माँ! ऐसी कृपा कर दो, बचे न कोई विरुद्ध में।
तुम्हारी ममता ऐसे फैले, तुम ही चारों ओर हो
एक ऐसा संसार दिखा दो, जिसका ओर न छोर हो।
एक यकीन को पास लाकर एक भरम को तोड़ दो
माँ! इस ज़मीं को ऊँचा करके आसमान से जोड़ दो।
या तो चाहत की इस डोर को अपने छोर से छोड़ दो
या तो इसे जोड़ हवा का रुख मेरी तरफ अब मोड़ दो।
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