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एक सफल विद्यार्थी का अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान

                
                                                         
                            मैं क्या था, क्या हूँ, नही जानता,
                                                                 
                            
पर मेरी पहचान, मेंरा नाम हो तुम।

मैं एक ठहरा हुआ पानी जैसा था,
मगर मुझे जो मिला वो आकार हो तुम।

मैं नादान, अनजान, बालक था,
पर ज्ञान का बहता हुआ समंदर हो तुम।

मैं एक अनगढ़ पत्थर जैसा था,
पर उज्ज्वल भविष्य के शिल्पकार हो तुम।

मैं सचमुच सपनों में रहता था,
मगर मेरे सपनों की रफ्तार हो तुम।

मेरी उम्मीदों का हौसला पस्त था,
पर जोश और जुनून की आग हो तुम।

मैं बिखरा हुआ तिनका-तिनका सा था,
मेरी जिन्दगी के चोटी पहाड़ हो तुम।

मैं असमंजस में था, कि खुद को कहां ले जाऊं,
मेरे पथ की सफलता के महान सलाहकार हो तुम।

मेरे व्याकुल जीवन में अजीब सी चिंता थी
मेरी हर चिंता के मुकम्मल समाधान हो तुम

न जाने कितनी मुश्किलों को झेला मैंने,
मेरी हर मुश्किल सवाल का जबाव हो तुम।

मैं बार-बार प्रणाम करूं, चरण स्पर्श करूं कम ही लगता है,
मेरे हर आदर सत्कार के हकदार हो तुम।

मेरे जीवन की हर उपलब्धि में आपका योगदान है,
मेरे लिए सचमुच एक अनमोल वरदान हो तुम।।
 - अमर एहसास
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5 घंटे पहले

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