वो गए तो फ़क़त उम्र ढलती रही
उनके जाने पे भी साँस चलती रही
ज़र्द पत्तों-सा मौसम गुज़रता रहा
एक तस्वीर आँखों में पलती रही
झील का पानी ऊपर से ठहरा ही था
तह-ब-तह कश्मकश सी मचलती रही
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