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सपने तुम्हारी आंखों में

                
                                                         
                            तुम्हारी आँख में सपने हमारे आज भी क्यों हैं,
                                                                 
                            
बिना कहे सुनी वो बातें प्यारे आज भी क्यों हैं?

हवा में घुल गई थी जो सासें हमारे प्यार की,
वो सुगंध लिए तेरे गलियारे आज भी क्यों हैं?

छुपा रखे थे जो जज़्बात तुमने वक़्त की तहों में,
वो अनकहे से शब्द बेचारे आज भी क्यों हैं?

तू मुस्कुरा के चल दिया था छोड़ कर उस मोड़ पर,
पर लौटते वो दृश्य हमारे आज भी क्यों हैं?

तेरी पलकों पे ठहरी नमी से जब भी पूछते हैं हम,
तो कहती हैं – वो ख़्वाब प्यारे आज भी क्यों हैं?

जो बीत गया, वो पल तो गुज़िश्ता हो गया शायद,
मगर दिल में चुभे गुज़रे इशारे आज भी क्यों हैं?

अगर भूले हो हमें, तो हर सुबह फिर क्यों ख्वाबों में,
तेरे संग बिताए मौसम संवारे आज भी क्यों हैं?
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एक वर्ष पहले

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