कर्म भी तू किये जा, प्रभु नाम लिए जा ,
सत्य होगा विधि का विधान तू जान ले,
विश्व विजयी तू होगा, ये बात सत्य है,
एक ध्येय धरे मन, पथ एक ठान ले।
रहबरी न मिले ,तो राहगीर संग चल,
न पीछे देख ,तू बात मेरी मान ले,
ये जिंदगी है चार दिन की ,न तू गुमान कर,
दिल यूं ही जीत ले, सभी को अपना मान ले,
मुश्किलें तो आएंगी, आनी हैं, तो आएँगी,
कोशिश तू कर जा न कोई मलाल ले,
बुलंदियों पे जो चला आह न कभी भरी,
जो जीते हैं जीत की, उन्ही से तू मिशाल ले
जो, ज़िंदगी को मेहनत के नाम तूने कर दिया,
तो माँ की दुआवों को अज़ान भी तू मान ले,
दुआ के ख़ज़ानों की कीमत अनंत है,
ये बात मेरी सत्य है तू बात मेरी मान ले।
Alok yadav
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X