मम्मी-पापा मुझको अपना बेटा समझें,
ना लड़का ऐसा-वैसा समझें।
मैं उसकी जली रोटियाँ भी हँसकर खाऊँगा,
मम्मी-पापा मैं उसका हाथ बटाऊँगा।
मैं जब काम से घर लौटूंगा,
तो मैं उसके पाँव दबाऊँगा।
मोहब्बत हद से ज्यादा समझें,
और ये मेरा आपसे वादा समझें।
अपने वादे से ना मैं मुकरूँगा,
आप ना मुझको नेता समझें।
मम्मी-पापा मुझको अपना बेटा समझें,
ना लड़का ऐसा-वैसा समझें।
उससे दूर मैं सारे दुख रखूँगा,
मम्मी-पापा मैं उसको हरदम खुश रखूँगा।
उसको हसाने के बहाने ढूँढूँगा,
वो लड़कर सो जाए तो उसका माथा चूमूँगा।
वो मेरे साथ खुशियों का समंदर देखेगी,
मम्मी-पापा वो आपको मेरे अंदर देखेगी।
मेरी मोहब्बत को भी आप अपनी मोहब्बत जैसा समझें,
और मम्मी-पापा मुझको अपना बेटा समझें,
ना लड़का ऐसा-वैसा समझें।
-आलोक शर्मा
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