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मेरा दोस्त ईश्वर सा

                
                                                         
                            कुछ तो कर्म किए थे अच्छे, कि उस जैसा यार मिला,
                                                                 
                            
गद्दारों की दुनिया में इस जैसा वफादार मिला ।

मैं जब हारने लगता हूँ, वो उम्मीदें हो जाता हैं,
मेरी जीत में मुझसे ज्यादा तो वो खुश हो जाता हैं।

मुसीबतों में वही शख्स बस मुझको घर सा लगता हैं,
कभी-कभी वो दोस्त मुझे बिल्कुल ईश्वर सा लगता हैं।

कभी भी अपना रंग ना बदले, ऐसा यार मिला हैं जी,
मानो जैसे इस कलयुग में मुझको कर्ण मिला हैं जी।
-आलोक शर्मा 
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एक घंटा पहले

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