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धूप छांव के ये खेल खेले जिंदगी

                
                                                         
                            आ गया ग़मों में अगर मुस्कुराना
                                                                 
                            
कदमों में तेरे नाचने लगेगा ज़माना

आसान सी हो जायेगी जीवन की राह ये
छेड़ना राग कोई क्यों ही पुराना

लगने लगे अपनी जैसी पीर पराई
सीख लेना धन तू नेकियों का कमाना

धूप छांव के ये खेल खेले जिंदगी
रहता ही नहीं है सदा मौसम ये सुहाना

रुखसार कड़ी धूप में खिल जायेगा आलोक
देख ओढ़ रूह पे फकीरी का बाना
-आलोक
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6 घंटे पहले

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