हारी जंग यह हमको हमेशा ही जिताते हैं
होते हौसले जिनमें वही मंजिल को पाते हैं
ज़माना याद युग युग तक सदा उनको ही तो करता
दौलत लोग नेकी की यहाँ जितने कमाते हैं
देखे खाक में मिलते खजाने पन्ना मानिक के
दुआओं के ही मोती तो यहाँ बस काम आते हैं
जादू उफ़ ये उल्फत का सर पर चढ़ के जब बोले
महक से भरती हैं चितवन अधर भी कंपकंपाते हैं
है फितरत यह भी लोगों की क्या आलोक बतलायें
अमूमन बात वो दिल की खुदा से भी छुपाते हैं
-आलोक
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