इस जहान में यहाँ जितने फकीर हैं
शायद किसी भी शाह से ज्यादा अमीर हैं
कहते हैं कैद इनमें है तकदीर सभी की
रब ने हथेली में खींच दी लकीर हैं
बंदा खुदा का आप उनको ही मानिये
जिन्दा तंग हाल में जिनके ज़मीर हैं
मोहन के रंग में मगन मीरा बना वही
तोड़ दी पाँव की जिसने जंजीर हैं
दो बोल बोलिये तो मगर सोच समझ कर
आलोक कलेजे में उतरते ये तीर हैं
-आलोक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X