आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दो बोल बोलिये तो मगर सोच समझ कर

                
                                                         
                            इस जहान में यहाँ जितने फकीर हैं
                                                                 
                            
शायद किसी भी शाह से ज्यादा अमीर हैं

कहते हैं कैद इनमें है तकदीर सभी की
रब ने हथेली में खींच दी लकीर हैं

बंदा खुदा का आप उनको ही मानिये
जिन्दा तंग हाल में जिनके ज़मीर हैं

मोहन के रंग में मगन मीरा बना वही
तोड़ दी पाँव की जिसने जंजीर हैं

दो बोल बोलिये तो मगर सोच समझ कर
आलोक कलेजे में उतरते ये तीर हैं
-आलोक
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर