जिंदगी क्या कहूँ कि क्या ही बात है
पालकी ग़मों की खुशी की बरात है
देखिये तो हर तरफ ही खेल चल रहे
शह किसी को मिल गई किसी को मात है
धूप सी तबस्सुमें रुदन की बारिशें
दिन अगर है भाग में तो तय ये रात है
दिन यहाँ रहे हमेशा किस के एक से
जादूगरी खुदा की है ये क़ायनात है
जितना मिला वह बहुत मान कर तू चल
सारी इस जहान में किस्मत की बात है
जो आया उसकी एक दिन रवानगी भी है
बुनी गई इस तरह हाँ यह हयात है
रख रहा संभाल कर आलोक हर कदम
बिछी हुई जो जिंदगी की बिसात है
-आलोक
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