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कुछ यादें बहुत सताती हैं

                
                                                         
                            किसी के यादों में हम कितने टूट जाते हैं इसे हम शब्दों में नहीं पीरों सकतें। लेकिन फ़िर भी मैं कोशिश किया हूँ कि हमारे प्रकृति भी कैसे टूट जाती है। फिर हम तो इंसान है
                                                                 
                            

कुछ यादें उम्र भर सताती हैं,
जैसे नीम में कड़वाहट होती है,
वैसे ही कुछ यादें कड़वी होती हैं।

वक्त जब फिसल जाता है,
तो फिर वापस मुड़कर नहीं आता,
जैसे, पानी नदी की धार के साथ
बहकर आगे निकल जाता है।

फिर, किनारा उसके इंतजार में,
या उसके बिछड़ने के वियोग में,
टूट कर बस बिखर जाता है।

प्रेम वैसे ही अधकचा है,
देखते ही प्यार हो जाता है,
चंद लम्हों में छूट जाता है।

रह जाती हैं तो बस यादें
या फिर ख्यालों में आकर,
जो हर पल हमें सताती हैं।

कुछ यादें उम्र भर सताती हैं,
जैसे नीम में कड़वाहट होती है,
वैसे ही कुछ यादें कड़वी होती हैं।
 
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3 महीने पहले

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