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वह मुझे इशारों से बुलाती है शाम ढलने पर

                
                                                         
                            वह मुझे इशारों से बुलाती है शाम ढलने पर
                                                                 
                            
रुपहले सितारों की साड़ी में वह लिपटती है शाम ढलने पर

हमारे भोलेपन को देखकर मुस्कराती है शाम ढलने पर
निशब्द देख निशा छिटककर नृत्य करती शाम ढलने पर

नील परिधान बीच श्वेत सितारे मन भाये शाम ढलने पर
वह मुझे इशारों में बुलाती है शाम ढलने पर

निशा मिलती निशापति से अकेले में शाम ढलने पर
वह मुझे इशारों से बुलाती है शाम ढलने पर

[अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर ]

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6 वर्ष पहले

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