रजनी साथ रहे उडगन
न अब रजनी न अब उडगन।
बीती विभावरी छाई मुस्कान,
खगकुल की है मीठी तान।
प्राची दिशि खड़ी सुन्दरी,
लाल बिन्दी सोहै भाल।
एक टक वह खड़ी हुई ,
लालीमय जिसके गाल।
लाल चूनर शोभित तन,
हाथ जिसके सजा है थाल।
स्वागत करने अपने प्रिय का ,
ऊषा सुन्दरी उत्सुक आज।
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