आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ऋतुराज बसंत

                
                                                         
                            ऋतुओं का राजा
                                                                 
                            
आया बसंत ,
स्वागत -स्वागत
तेरा बसंत।
स्वागत करते
किसलय तेरा ,
स्वागत करते
प्रसून तेरा।
कलियाँ भी
स्वागत करती ,
मुस्कातीं हैं
दे चिटकारी।
घर घर युवतीं
ख़ुशी मनातीं,
पीली साड़ी
पहिन निकलतीं।
पादप हों
या नर नारी ,
बसंती रंग है
सब पर भारी।
हाथों में
रची है मेंहदी ,
पैरों में
सजी महावर है।
खुशियां छाईं
दिग दिगंत ,
स्वागत स्वागत
तेरा बसंत।

 हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर