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प्रताप का भाला

                
                                                         
                            

राणा ने खाई घास की रोटियाँ
शैया जिनकी कंकड़ पर
अरावली की पहाड़ियाँ भी
राणा संग हो गई अमर

अकबर सेना बहुत विशाल 
प्रताप सेना पहुँची समर
देखि चेतक चाल जबै
भगदड़ मच गई बीच समर

चेतक ने अब पैर रखे 
मान सिंह के हाथी पर
भय से हौदा हिल गया 
गिरते गिरते भूमि पर

भाला देखा राणा का 
काँपा मान सिंह थर-थर
अब राणा के एक इशारे से
चेतक पहुँचा बीच समर

प्रताप का भाला ऐसा चला 
चिघ्घाड़े हाथी बीच समर
शोणित धारा ऐसी बही 
सैनिक बह रहे बीच समर।

- अशर्फी लाल मिश्र


-हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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5 वर्ष पहले

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