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पीछे पीछे वृषभानु लली

                
                                                         
                            खेलत खेलत एक दिवस ,
                                                                 
                            
कान्हा पहुँचे वृषभानु गली।
देख दुवारे वृषभानु खड़े ,
कान्हा पूँछै वृषभानु लली।।

कान्हा द्वार पुकार रहे ,
बहार आओ मेरी लली।
बाहर आई वृषभानु दुलारी ,
खेलन चलिहौ मेरी गली।।

ताहि समय अधराधर धरि वंशी ,
गूँज गई वृषभानु गली।
आगे आगे कान्हा चलि रहे ,
पीछे पीछे वृषभानु लली।।

 Asharfi Lal Mishra,
Akbarpur,Kanpur
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5 वर्ष पहले

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