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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            माता होय प्रथम गुरू, दूजा गुरु पितु मान।
                                                                 
                            
औपचारिक देय ज्ञान,अन्य गुरु उसे जान।।

- अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर।
 
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4 वर्ष पहले

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