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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            श्वेत केश तजुर्बे के, काले केश उमंग।
                                                                 
                            
काजल रेख नयन संग , मन में भरता रंग।।

पाषाण हृदय

पाहन हिय मृदुता संग ,सरल ह्रदय बन जाय।
जिमि शैल खंड जल धार, रुचिर शिवांग कहाय।।

- अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर
 
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4 वर्ष पहले

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