मुजरिम से नेता होय , पावै आदर भाव।
जिमि तांबा मिलि कनक में , बिकै कनक के भाव।।
राजनीति में प्रविशि कर , वाणी रगड़ नहाय।
जीवन का सब मैल धुलि ,उत्तम कीरत पाय।।
कवि : अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।
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