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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            आँख देखे सारा जग , खुद नहि देखी जाय।
                                                                 
                            
जो खुद देखे आप को , वही साधु कहलाय।।

सम्मुख हो बोल मीठा , पिछे बिगाड़े काम।
छोड़ो ऐसे मीत को , करो अकेले काम।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।


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7 वर्ष पहले

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