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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            प्रेम
                                                                 
                            

प्रेम ह्रदय में जनमे , ना चाहे प्रतिदान।
चाहत यदि प्रतिदान की , उसे वासना जान।।

पीड़ा

जानै पीड़ा न समझे , बनता हो अनजान।
मत कहिये पीड़ा ताहि , उसका दिल श्मशान।।


--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।


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7 वर्ष पहले

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