प्रेम
प्रेम ह्रदय में जनमे , ना चाहे प्रतिदान।
चाहत यदि प्रतिदान की , उसे वासना जान।।
पीड़ा
जानै पीड़ा न समझे , बनता हो अनजान।
मत कहिये पीड़ा ताहि , उसका दिल श्मशान।।
--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।
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