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नीति के दोहे मुक्तक

                
                                                         
                            कर्म
                                                                 
                            

भाग्य बदले कर्म से , कर्म बदलता सोच।
अजगर सोचे उदर की , नाहीं बदले सोच।।

संकट

प्रबल प्रवाह दरिया का , ठहरो करो विचार।
संकट काम आवै नाव , करती दरिया पार।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।


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7 वर्ष पहले

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