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                            दुर्जन
                                                                 
                            

विषधर तभी है डसता ,जानहि जोखिम जानि।
दुर्जन सदा हि घात में ,पग पग देवै हानि।।

पतन

तटिनी तट पर होइ तरु , विपक्ष रहित जनतंत्र।
लाल कहें दोऊ तुरत, मिटै तरु लोकतंत्र।।

- Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur

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5 वर्ष पहले

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