दुर्जन
विषधर तभी है डसता ,जानहि जोखिम जानि।
दुर्जन सदा हि घात में ,पग पग देवै हानि।।
पतन
तटिनी तट पर होइ तरु , विपक्ष रहित जनतंत्र।
लाल कहें दोऊ तुरत, मिटै तरु लोकतंत्र।।
- Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur
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