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मेरे बलमा के नखरे बड़े बड़े

                
                                                         
                            मेरे बलमा के नखरे बड़े बड़े ,
                                                                 
                            
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।

बचपन बीता यौवन बीता ,
बीता सारा जीवन।

वाणी मेरी क्षीण हुई है ,
क्षीण हुआ है तन।।

आओ बलमा पकड़ो बांह ,
पूरन कर दो मेरी चाह।

बलमा छोड़ो अपने नखड़े ,
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।।

उलझा हूँ तृष्णा में ,
पड़ा हुआ माया के बंधन।

हृदय हमारा करता क्रंदन ,
दया विचारो हे जगबन्दन।।

भाई बन्धु मेरे काम न आवें ,
एक आस बची है सजना की।

आँखें मेरी पंथ निहारे,
राह देखती प्रियतम की।।

आओ प्रियतम छोड़ो नखड़े ,
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।

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8 वर्ष पहले

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