आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Mere balamaa ke nakhade bade bade

मेरे अल्फाज़

मेरे बलमा के नखरे बड़े बड़े

AL Mishra

48 कविताएं

233 Views
मेरे बलमा के नखरे बड़े बड़े ,
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।

बचपन बीता यौवन बीता ,
बीता सारा जीवन।

वाणी मेरी क्षीण हुई है ,
क्षीण हुआ है तन।।

आओ बलमा पकड़ो बांह ,
पूरन कर दो मेरी चाह।

बलमा छोड़ो अपने नखड़े ,
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।।

उलझा हूँ तृष्णा में ,
पड़ा हुआ माया के बंधन।

हृदय हमारा करता क्रंदन ,
दया विचारो हे जगबन्दन।।

भाई बन्धु मेरे काम न आवें ,
एक आस बची है सजना की।

आँखें मेरी पंथ निहारे,
राह देखती प्रियतम की।।

आओ प्रियतम छोड़ो नखड़े ,
मैं पुकार रही हूँ खड़े खड़े।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!