आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Maan ki mamataa

मेरे अल्फाज़

मां की ममता

AL Mishra

48 कविताएं

56 Views
इक इकहरी लम्बी काया ,
चली जा रही थी धुन में।
पथ निर्जन गोधूली बीती,
नभ पूरित था काले मेघों से।।
पीछे किसी की आहट पा ,
कदमों की तेजी बढ़ने लगी ।
पीछे मुड़कर देखा जब ,
कोई एक काली छाया थी।।
अब तो और कदम थे तेज,
दिल की धड़कन बढ़ने लगी।
अनुगामी काली छाया ने,
तेजी से कदम बढ़ाये थे।।
आगे आगे पथिक चले,
पीछे अनुगामी छाया थी।
पथिक ने मुड़कर देखा जब,
इसी बीच बिजली चमकी।।
अब पथिक ने कदम थे रोक दिये,
अनुगामी को अपनी बाँहों में भर।
आनंद का अनुभव करने लगी,
आगे आगे मां थी बेटा था पीछे पीछे।।

--अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर , कानपुर।


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!