लाल शतक (दोहे)-खण्ड -2

                
                                                             
                             अशर्फी लाल मिश्र , अकबरपुर ,कानपुर।
                                                                     
                            

कवि की कविता जानिये ,कलम बंधी न होय।
निष्पक्ष उसकी लेखनी ,राष्ट्र हितहि में होय।।-[51]

कर (टैक्स )

भानु भूमि रस लेय जस, तस कर दोहन होय।
जन हित में जब कर लगे ,जनता हर्षित होय।।=[52]

सौतन पीड़ा

सौतन पीड़ा सौत ही ,और न जाने कोय।
या फिर जानै गोपियाँ ,अधर बसुरिया होय।।-[53]

अहंकार

अहंकार के अश्व चढ़ ,मत इठलाये कोय।
मानव तन नश्वर होइ ,यह जानत सब कोय।।-[54]

कपट

सत्य कभी डिगता नहीं ,असत्य टिकता नाहि।
जब कपट सफलता होइ ,मानव मदांध होहि।।-[55]

श्राद्ध

कृष्ण पक्षहि आश्विन मास ,करिये पितरहि मान।
पितर दें आशीष सबहि ,करैं सबहि कल्यान।।-[56]

पितर तिथि होय जलदान ,अति उत्तम सम्मान।।
पितर तिथि के इतर करे,पूनौ तिथि जलदान।।-[57]

माता का करिये श्राद्ध ,जब तिथि नवमी होय।
मनोवांछित फल पावै , घर की उन्नति होय।। -[58]

मानवता
धन बल जन बल होइ जब ,हर दुर्गुण छिप जाय।
ऐसे बली के सम्मुख , मानवता शरमाय।।-[59]

धनहि होड़ चारिउ ओर , नीति अनीति न जान।
ऐसे धनहि संग्रह से , कबहुँ न हो कल्यान।।-[60]

लूट मची बाजार में ,जो चाहे सो लूट।
घटिया माल बजार में ,मिले छूट पर छूट।।-[61]

पड़ोस

पुण्य पीढ़ियों के जान , सुन्दर होय पड़ोस।
कुछ हानि होय या कष्ट , कर लीजै संतोष।।-[62]

शत्रु

रिपु कितना निर्बल होय ,सदा रहें हुशियार।
अवसर पाय मच्छर भी ,करता गहरी मार।।-[63]

रिपु को मत छोटा मान ,मत देखो आकार।
समय पाकर चींटी भी,करती गज पर वार।।-[64]

मशीन

कलयुग में कल की धूम ,कल से होते काम।
कल से जाय संदेशा ,कल से मिलते दाम।।-[65]

बसंत

पवन बिगड़ी बसंत की ,करिये प्रातः सैर।
शरीर होय वायु मुक्त ,लाल मनाये खैर।।-[66]

डिजिटल

डिजिटल भारत है आज ,फिर भी धीमा काम।
है चाल वही पुरानी , शासन हो वदनाम।।-[67]

राष्ट्रभक्ति

राज्य हित में कांटे भी , बन जाते हैं फूल।
अरावलीय पहाड़ियां ,राणा के अनुकूल।।-[68]

स्वभाव

केहरि छोड़े न स्वभाव ,कितना बूढ़ा होय।
हिंसा उसके मूल में ,कभी न सात्विक होय।।-[69]

हिंसक पशु या गंवार ,बर्रे छत्ता होय।
लाल कहे दूरी रखो ,मत छेड़ो इन कोय।। -[70]

विषधर नहि त्यागै वीष ,भले हि दूध नहाय।
जोगी तोड़े दन्त जब ,नाग हाथ में आय।।-71]

कोरोना वायरस

चीन देश का वायरस ,या जैविक हथियार।
बचो बचो की लगी रट ,जग में हाहाकार।।-[72]

कोरोना आहट जानि , पट बंद हुये आज।
मानो देवो के देव ,भयभीत हुये आज।।-[73]

कोरोना का संचरण ,वैश्विक आता जाय।
एकाकी जीवन शैली ,दिखे सुरक्षित उपाय।।-[74]

अपनाना एकांत वास , कर्फ्यू का सन्देश।
रुके वायरस संचरण ,दे उत्तम सन्देश।।-[75]

कोरोना का नाम सुनि , बाल वृद्ध भयभीत।
भय से घर में जा छिपे ,गायें प्रभु के गीत।।-[76]

कोरोना की आज तक , नहि कोई वैक्सीन।
सब लोग बेचैन दिखें ,ज्यों पानी बिनु मीन।।-[77]

कोरोना ने कर दिया ,हर किसी को अछूत।
विश्व में आज बढ़ गया ,हर जगह छुआ छूत।।-[78]

याचना

याचक खड़ा बजार में,मांगे सबसे भीख।
हर कोई मुंह फेरै ,नाहीं देता भीख।।-[79]

ऐ भिखारी तू सुन ले ,जा उस दाता पास।
जिसकी झोली है भरी ,न याचक हो निरास।।-[80]

नौकरशाह

जनतंत्री नौकरशाह ,दलगत देखा जाय।
सत्ता हो प्रतिकूल यदि ,काम टालता जाय।।-[81]

हर नौकरशाह पकड़े , इक खम्भा मजबूत।
कौन विधी शासन चले,कौन कील ताबूत।।-[82]

सुख

वशीभूत न लालच के ,निंदा से हो दूर।
ताहि जीवन सदा सुखी ,खुशियों से भरपूर।।-83]

भविष्य चिंता छोड़ दे ,भूतहि देय विसार।
वर्तमान संभाल ले ,सुखी होय संसार।।-[84]

खुशबू

फूल खुशबू साथ पवन ,पवन बहे जिस ओर।
प्रतिभा खुशबू खुद बहे ,फैले चारो ओर।।-[85]

कर्ज

पैसे दिये उधार हों ,मांगो बिनु संकोच।
डूब जाये सारा धन ,यदि होगा संकोच।।-[86]

धन उधार सदा उसको ,दिखता हो गुणवान।
अवगुणी करै न वापस ,धनहि पाइ धनवान।।-[87]

वारिधि देय उधार जल ,देख मेघ गुणवान।
घन बरसे वारि वापस ,सिंधु सदा धनवान।।-[88]

शर्म

व्यापार होय या काम ,शर्म पास नहि होय।
उसकी सदैव तरक्की , यह जानत सब कोय।।-[89]

अशिक्षा

अशिक्षित बालक होय यदि ,मातु पितु शत्रु समान।
विद्वानों मध्य ऐसे ,हंस मध्य वक जान।।-[90]

चिंता

पत्नी से वियोग होय, अपनों से अपमान।
गरीबी होय साथ में, अग्नि बिनु भस्म जान।।-[91]

सफलता

विश्वास होय कर्म में, साहस मन में होय।
ताहि सफलता जानिये , राखि योजना गोय।।-[92]

धीरे धीरे काम करु ,धीरे सब कुछ होय।
धीरे धीरे कोयला, इक दिन हीरा होय।।-[93]

दुर्जन

विषधर तभी है डसता ,जानहि जोखिम जानि।
दुर्जन सदा हि घात में ,पग पग देवै हानि।।-94]

पतन

तटिनी तट पर होइ तरु ,विपक्ष रहित जनतंत्र ।
लाल कहें दोनो मिटै , तरू और जनतंत्र ।।-[95]

कमजोरी

मत करो प्रदर्शन ताहि ,जो कमजोरी होय।
नहि छोड़े अहि फुसकार ,भले विषहीन होय।।-[96]

समर्थन

मत करो समर्थन ताहि ,गलत करे जो काम।
दूरी राखि सदा रहो , उधार देय न दाम।।-[97]

धैर्य

सिंधु तोड़े मर्यादा ,प्रलय भयंकर काल।
सज्जन सदा अडिग रहे ,विपत भयंकर काल।।-[98]

लक्ष्य

लक्ष्य केंद्रित होये यदि ,जैसे राखे शेर।
पूर्ण सफलता पाइये ,जैसे पाए शेर।।-[99]

शत्रु

भ्रष्ट भार्या साजन शत्रु ,कृपणहि याचक मान।
मूर्खहि रिपु ज्ञानी सदा ,चोर चन्द्रमा जान।।-[100]

© अशर्फी लाल मिश्र (Asharfi Lal Miahra)

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9 months ago

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