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घाट घाट का पानी पिया

                
                                                         
                            अफ्रीकी ट्रेन में धक्के खाये ,
                                                                 
                            
फिर भी मोहन निराश नहीं।
न्याय मंदिर में जज ने कहा,
सिर पर होगी पगड़ी नहीं।।

आंदोलन "चम्पारण" का ,
या फिर हो "भारत छोड़ो"।
घाट घाट का पानी पिया,
गांधी का "दांडी मार्च" हुआ।।

हाथ में जिनके लाठी ,
कमर में धोती आधी।
घाट घाट का पानी पिया,
गांधी कहलाये राष्ट्र पिता ।।

- अशर्फी लाल मिश्र,अकबरपुर, कानपुर

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5 वर्ष पहले

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