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देख शिवा का रण कौशल (मुक्तक )

                
                                                         
                            देख शिवा का रण कौशल,
                                                                 
                            
भयभीत सदा रहता आदिल।
अफजल आदिल का सेनापति ,
सेना रहती साथ सदा।।

अफजल जो भी चाल चले ,
शिवाजी उससे दूनी चले।
अफजल ने भेजा एक संदेश,
हुई शिवा अफजल की भेंट।।

कपटी अफजल साथ कटार,
शिवा के पीठ करता वार।
मराठा सिंह का बघनख वार,
आंते बाहर हाथ पसार।।

अब भूमि पड़ा था अफजल,
मचगई आदिल सेना में भगदड़।
देख शिवा का रण कौशल,
भयभीत सदा रहता आदिल।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर
 
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5 वर्ष पहले

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