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भार्गव राम खण्डकाव्य - 60

                
                                                         
                            भार्गव राम का हुआ आदेश,
                                                                 
                            
देवव्रत अब युद्ध प्रारम्भ करो।
नहिं पहला प्रहार हो गुरुवर का,
देवव्रत पहुँच गये अपने रथ पर।।

दिव्य वाण छोड़ा भार्गव राम ने,
देवव्रत कंधे को छूकर निकला।
हाथ से मलकर निज कंधे को,
छोड़ा देवव्रत तीर गुरु चरणों में।।


सूर्योदय के साथ होता युद्ध शुरू,
अरु बन्द होता युद्ध सूर्यास्त सदा।
पहला तीर सदा ही चले गुरु का,
अभिवादन तीर चले देवव्रत का।।

दिन इक्कीस हुआ भीषण युद्ध,
जय पराज्य का कोई निर्णय नहीं।
दोनों के थे अस्त्र दिव्यास्त्र समान,
पराजय किसी को स्वीकार नहीं।।

ऋषि मुनि अरु देव थे बेचैन सभी,
पहुँचे कुरुक्षेत्र पावन भूमि सभी।
संकेत पाय ऋषि मुनि अरु देवों का,
देवव्रत शीश था अब गुरु चरणों में।।
- अशर्फी लाल मिश्र
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8 घंटे पहले

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