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भार्गव राम खण्डकाव्य - 40

                
                                                         
                            चतुरानन मन में आया विचार,
                                                                 
                            
कौन शक्तिशाली आज ब्रह्माण्ड।
देवराज इन्द्र पास बुलाया तभी,
सुदृढ़ दो धनु निर्मित होंय अभी।।

थी अनावृष्टि ब्रह्माण्ड,
था वनस्पति अभाव।
होय सुदृढ़ बांस जब ,
हो सुदृढ़ धनु निर्माण।।

थे कण्व ऋषि तप में लीन,
दीमक से था ढका शरीर।
सिर ऊपर उगा एक बांस,
था सुदृढ़ लम्बा दिव्य बांस।।

थे देवराज खड़े कर जोरे,
साथ थे ब्रह्मा विष्णु महेश।
त्रिदेव पुकार रहे थे बार बार,
कण्व आँखें खोलो एक बार।।

त्रिदेओं की ध्वनि जब गूंजी,
कण्व ऋषि के कर्ण कुहर।
बाँबी दीमक हिल गई तभी,
गिर पड़ा बांस भूमि तभी।।
 
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2 महीने पहले

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