अंगना में ठुमुक चलहिं अवध विहारी।
मातु कौशल्या हर्षित होइ दै दै तारी।।
छुद्र घंटिका कमर करधनी।
पैर में बाजैं पैजनियाँ।।
दौड़े दौड़े अंगना घूमैं पीछे पीछे महरानी ।
माता लेइ बलइयां आज गोद उठाये रानी ।।
गले में सोहै 'हाय' हेम की माला।
भाल में टीका लगा था काला।।
अँचरा ढकि माई दूध पिलाये।
डरपि रही नजर न लागै लाला।।
Poet : Asharfi Lal Mishra, Akbarpur, Kanpur.
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