पायजामा चमाचम
कुर्ता चमाचम
अमीरी का परदा
पड़ा था तन पर
लोग लिपटे रहे
मधुमक्खियों की तरह
परदा हटा जब
गरीबी से था अब
लोग खिसकते गये
भोर के तारों की तरह
गरीबी को पा
हम सिसकते रहे
आंसुओं को लेकर
हम पीते रहे।
-अशर्फी लाल मिश्र ,कानपुर देहात
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