बुराई करो,
दुश्मनी करो,
जम के करो।
पर रहे ख्याल इतना,
जब हों आमने सामने,
आँखें हमारी नीची न हों ।।
-अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर
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