पहाड़ों की गोद में बसा मेरा गाँव,
जहाँ सुकून की खुशबू, अपनों का प्यार।
खेतों की हरियाली, चिड़ियों की तान,
मिट्टी की खुशबू में बसती मेरी जान।
न दौलत की चाह, न शोहरत का अभिमान,
छोटे-छोटे घर, पर बड़े-बड़े अरमान।
दुनिया में घूम लूँ चाहे चारों धाम,
मेरे गाँव की मिट्टी ही मेरी पहचान।
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