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चला हो जिस चाल से कदम उठाए

                
                                                         
                            रुके थे कदम कुछ पलों के लिए,
                                                                 
                            
लोग समझ बैठे कि थक गया

चले है मंजिल पाने अब थकना क्या
होस तभी आएगा मंजिल कदमों होगी

चला हो जिस चाल से कदम उठाए
मंजिल ढूंढ रहा हूँ कही नजर तो आए
~कुमार अखिलेश प्रकाश
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1 सप्ताह पहले

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